दोस्तों के ख़ासे इसरार और मशवरे के बाद ब्लॉग लिखने की तरफ मुतवज्जह हुआ. वैसे ब्लॉग राइटिंग को लेकर कुछ ख़ास जानता नहीं था, मगर जितना कुछ राइटिंग के बारे में जाना समझा है वो आपसे Share करने के लिए ब्लॉग राइटिंग करने की सलाह दे दी गयी. अच्छा अगर ये बात है तो "तुम्हारा हुक़म सर आँखों पर" यारों. ये भी सही. ब्लॉग लिखने बैठ गया. मगर लिखता क्या? काफी दिनों तक ब्लॉग का नाम ही सोचता रहा. आख़िर को जाकर अदब नवीसी नाम जँच गया.
हिंदी, उर्दू, अरबी, फ़ारसी के अदब के कोहसारों (पहाड़ों) और रेडियो, टी.वी. से लेकर फिल्मों तक जिस पत्थर से टकराए उससे ही कुछ न कुछ सीख का नगीना लेते चले. अब तक की ज़िन्दगी में जो मिला वो आपसे बाँट लेता हूँ. आगे की ज़िन्दगी का अल्लाह मालिक है.
Is aadmi mein baat hai ... Kam hi log Dil paper pe utaar paate hain. Dil ki sunna pasand hai to yahan aaiye.
ReplyDeleteLovely words. This is very good writing :)
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